सत्र 18-20
समापन समारोह-एक अविस्मरणीय पल
दिनाँक-06-02-2025
कमलेश प्रसाद शर्माबाबू
(समापन समारोह में दिए गये अपन अनुभव अउ विचार)
छंद के छः परिवार के
संस्थापक पूज्य गुरुदेव श्री अरुण निगम जी ल सादर प्रणाम,कर्मठ साधक भैया जितेन्द्र कुमार वर्मा जी ल सादर नमन अउ हमर छंद कक्षा के गुरु आशा देशमुख दीदी जी ल घलो सादर नमन हे साथे-साथ अभी तक गुरु के भूमिका में रेहे सबो गुरूजी मनला सादर नमन हे।ये पटल में जुड़े सबो साधक भाई बहिनी ल घलो सादर नमन हे।
छंद परिवार में जुड़े के पहिली मैं कविता कहानी लिखत रेहेंव फेर मोला कुंडलियाँ लिखे के भारी शौक रिहिस।एक बार मैं ईश्वर साहू आरुग जी द्वारा संचालित आरुग चौरा के आनलाइन काब्य सम्मेलन में अपन लिखे एक कुंडलियाँ पढ़ेंव।बाद में आरुग जी मोला फोन करके किहिस कि काब्य पाठ के समय आपला नइ टोकेंव शर्मा जी फेर आपके कुंडलियाँ में बहुत गलती रिहिस।कुंडलियाँ के विधान होथे तब मैं जानेव कि येखरो विधान होथे नइ तो मोला अतके जानकारी रिहिस कि येखर पहिली लाइन के पहिली वाक्य छठवा लाइन के आख़िरी में आथे अउ दूसरा लाइन के आख़िरी तीसरा लाइन के शुरुआत होथे। बाद में गुरु जी बोधन राम निषाद जी के संपर्क में आयेंव अउ वोमन मोला छंद कक्षा के बारे में बताइन तब जानेंव वोमन ज्ञानु मानिकपुरी सर जी के नंबर दीन अउ गुरुदेव मोला सत्र -20 में जोड़िस तेन हा 3 मई 2022 के बैसाख अक्ती के दिन शुरु होइस।
शुरू-शुरू में मात्रा विधान मनला जानेंव फेर अभ्यास शुरू होइस त कुछ दिक्कत घलो होइस एक दू बेर दूसर के कापी पेस्ट करे के गलती घलो करेंव फेर बाद में सब सामान्य होगे। फेर मोला छंद सीख जहूँ अइसे भरोसा नइ रिहिस।इही बीच राजनांदगांव या डोंगरगढ़ में छंद के छः: के एक सम्मेलन में पूज्य गुरुदेव निगम जी से मिलन होइस उहाँ गुरु अउ शिष्य परंपरा देखके मैं अभिभूत होगेंव अउ जब गुरु जी के छंद के प्रति विचार अउ संबोधन ल सुनेंव तब मोला लगिस कि मैं पचास साल के उमर में भी छंद सीख सकथँव वो दिन लगिस कि मोला आज छंद के संत मिलगे।मोला पक्का भरोसा होगे।जइसे हनुमान जी ल देखके विभीषण किहिस
"अब मोहि भा भरोस हनुमंता।
बिनु हरि कृपा मिलय नहीं संता"।
मोला लगिस मोर ऊपर अवश्य भगवान के बहुत बड़े कृपा होय हे कि छंद के संत से मिलन होय हे।
हमर गुरु के भूमिका में पहिली इंद्राणी साहू दीदी, आशा देशमुख दीदी अहिलेश्वर सर जी,अउ बहुत झन गुरुजी मन रिहिन फेर बाद में पूरा उत्तरदायित्व आशा दीदी सम्हालिस। अभ्यास करत-करत गुरु शिष्य परंपरा के साथ हि भाई बहन के संबंध हमर रिहिस। दीदी जी कई बार भैया जी करके संबोधित करँय।
आज हमर सत्र के समापन में मन भावुक होवत हे वोतका दिन ले लगय ढाई साल होवत हे कक्षा कब समाप्त होही अउ आज लगत हे कि समापन के बाद मैं बेरोजगार हो जहूँ का? काबर के मैं डाँक्टरी पेशा से जुड़े हँव पहिली मैं एक से दो तीन बजे तक आराम करत सोवत रेहेंव फेर जब से छंद में जुडेंव मोर सोना छूटगे अउ वो समय मैं रोज़ नियमित अभ्यास करँव।
अंत में गुरुदेव जी ल सादर नमन करत सबो गुरु जी मन के आभार हे।
कमलेश प्रसाद शर्माबाबू
सत्र -20
कटंगी-गंडई
जिला केसीजी छत्तीसगढ़
9977533375
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